तुझे निहारना…..

तुझे निहारना
तुझे
जी भर के निहारना
और
अपने इन आंखों में उतारना
तब तक उतारना
जब तक तेरा ये चेहरा,
रूह में ना बस जाए
तब तक निहारना
जब तक तेरा ये चेहरा
और उसका हर एक जर्रा
जेहन में ना बस जाए
तुझे निहारना….जी भर के निहारना.

किसी को नहीं पता…….

किसी को नहीं पता,
वो तकलीफ,
जो अपनी ही किसी “पसंद” को
“नफरत” करने पर होती
वो ज़र्द,
जो अपनी ही किसी “ख्वाहिश” को
“नापसंद” करने पर होती
वो पल,
जब अपनी ही कोई “चाहत”
खुद को शर्मिंदा कर जाती
क्या सोचा था आपने ?
क्या महसूस किया था आपने?
किसी ऐसे के लिए जो उसके एक भाग के भी
कभी योग्य ना था
क्या खयाली पुलाव बनाए थे आपने?
किसी ऐसे के लिए
जो आपकी वो मोहब्बत,
निस्वार्थ होकर,
भगवान के दर पर मांगने वाली वो मन्नत
कभी उसके काबिल ही ना था
आपने अपना सारा वक्त उसके नाम किया
आपने अपना सबकुछ उसके नाम किया
और
उसने आपको,
एक मेज पर पड़े किसी खराब हो चुके सामन की तरह समझा
जिसका जब तक काम था,
वो प्रयोग में था
जैसे ही काम हुआ,
उसे उठाकर, घर के बाहर फेंक दिया
ऐसे किसी स्वार्थी इंसान को,
कोई पसंद कैसे कर सकता
ऐसे किसी सिर्फ अपने बारे में सोचने वाले इंसान को
कोई अपना सब कुछ कैसे मान सकता?
अनगिनत सवाल
जिनका कोई जवाब नहीं
जिस चेहरे से कभी आपको इश्क हुआ करता था
उसी चेहरे को देखकर
आपको नफरत होती
जिस इंसान के खयाल भर से आप मुस्कुरा देते थे
इस इंसान के,
बस जिक्र मात्र से आप आग बबूला हो जाते
और
मजे की बात,
आपका वो गुस्सा, किसी भी प्रकार से गुस्सा नहीं होता
ये गुस्सा उन सब वाकयात का मिला जुला असर होता,
जो आपने झेली हैं
ये गुस्सा उन तकलीफ भरे आंसुओं का होता
जो सिर्फ अपने महसूस की होती हैं
इसे कोई और न ही कभी समझ सकता
इसे कोई और न ही कभी महसूस कर सकता
पसंद, पसंद से मोहब्बत,
और मोहब्बत से नफरत
ये सफर तय करने में,
आपने कितना कुछ दाव पे लगाया
ये व्यथा किसे जाकर सुनाई जाए?
जब आपको अपनी हो पसंद पर शर्मिंदा होना पड़े
जब वो लोग सही साबित हो जाएं,
जिन्होंने आपको शुरू में ही
आगाह किया था,
वो इंसान सही नहीं
वो इंसान काबिल नहीं
लेकिन आपने किसी की ना सुनी
और जिस दिल की सुनी,
उसी दिल के हजार टुकड़े करके, वो इंसान आपके सामने
वो सब, किसी तीसरे के लिए वो सब कर रहा
जिससे उसको मिले कुछ दिन भी ना हुए
अजीब है ये पसंद,
अजीब हैं ये लोग,
अजीब है ये दुनिया.
प्यार एक से करो,
उससे नफरत होने पर, दुनिया के लोगों से ही नफरत हो जाती

hating someone with all your heart…..

what a journey it was
loving a person
to
cursing your choice
hating same person
disliking your own thoughts you had for them
begging in front of God
crying in front of God
about “why this” and “why me”?
pleading for your well being

telling negative about same person
to those people
to whom once you described your crushing behaviour
hating all those memories you had since the whole time
hating all your tears which are being wastedfor a selfish person like that

GOD ?
DO THEY EVEN DESERVE GOODNESS ?
DO THEY EVEN DESERVE SMILES WHEN SOMEONE IS CRYING BECAUSE OF THEM?
DO THEY EVEN DESERVE NORMAL LIFE WHEN SOMEONE IS HAVING ANXIETY BECAUSE OF THEM ?

if YES then this world is definitely not for me atleast

stay with hundreds of ENEMIES
than
this SELFISH FRIEND or LOVE who are good to you one day and worst to you on another day
stay with hundreds of people who are BAD on your face
than these manipulators who make you cry by being fake

and
after making others in tears
even god can’t forgive these people
after making others in panic attacks
even god can’t forget their faces

THE TRUST I HAVE IN HIM
THE FAITH I HAVE IN HIM

BABA ……..ARE YOU SEEING THE PAIN I AM DEALING ?

वो जो था ख्वाब सा ….

वो जो था ख्वाब सा
क्या कहें जाने दें
ये जो है कम से कम
ये रहे के जाने दें

आदतन तो सोचेंगे
होता यूँ तो क्या होता
मगर जाने दे

वो जो था ख्वाब सा
क्या कहें जाने दें
ये जो है कम से कम
ये रहे के जाने दें

आसान नहीं है मगर
जाना नहीं अब उधर
मालूम है जहां दर्द है
वही फिर भी क्यूँ जाएँ
वही कशमकश वही उलझने
बेहतर तो ये होता
हम मिले ही ना होते
मगर जाने दे

वो जो था ख्वाब सा
क्या कहें जाने दें
ये जो है कम से कम
ये रहे के जाने दें

शायद..

as they say,

“जो तुम्हारा होगा, वो कभी तुम्हे छोड़कर जायेगा नहीं. और जो चला गया, तो फिर वो कभी तुम्हारा था ही नहीं”

the scenario that

शायद…
वो फिर कभी
लौट कर नहीं आएगा
और
शायद….
मैं उसे अपनी जिन्दगी में दोबारा आने का मौका भी ना दूं
लेकिन
एक सवाल….सवाल
जो हमेशा मन में रहेगा
कि क्या इतना आसान था मुझे जाने देना ?
कि…
क्या इतना आसान था मेरे साथ बीते हुए वक्त को,
नजरअंदाज कर देना
और
क्या इतना आसान था
अपनी जिन्दगी से मेरा वजूद मिटा देना
जैसे तुम मेरे कुछ थे ही नहीं
जैसे हम कभी मिले ही नहीं
या फिर
जैसे मेरा प्यार कुछ था ही नहीं
क्या तुम्हे कभी नहीं आती ?
ये बात जहन में
की मेरा कुछ तो हक था तुम्हारे पे
की मेरा कुछ तो फर्क था तुम्हारे पे

missing someone…

missing someone
when you are at place…. full of crowd
and
not being able to tell them
you are missing them
is different kind of pain
which
only you can understand
what you are going through
wanting their presence most
needing too see their smile
craving for their voice
and
not being able to tell
any of this
to them
because
it’s about YOU only
not THEM
the suffering is real
the pain is real
the suffocation is real

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