
as they say,
“जो तुम्हारा होगा, वो कभी तुम्हे छोड़कर जायेगा नहीं. और जो चला गया, तो फिर वो कभी तुम्हारा था ही नहीं”
the scenario that
शायद…
वो फिर कभी
लौट कर नहीं आएगा
और
शायद….
मैं उसे अपनी जिन्दगी में दोबारा आने का मौका भी ना दूं
लेकिन
एक सवाल….सवाल
जो हमेशा मन में रहेगा
कि क्या इतना आसान था मुझे जाने देना ?
कि…
क्या इतना आसान था मेरे साथ बीते हुए वक्त को,
नजरअंदाज कर देना
और
क्या इतना आसान था
अपनी जिन्दगी से मेरा वजूद मिटा देना
जैसे तुम मेरे कुछ थे ही नहीं
जैसे हम कभी मिले ही नहीं
या फिर
जैसे मेरा प्यार कुछ था ही नहीं
क्या तुम्हे कभी नहीं आती ?
ये बात जहन में
की मेरा कुछ तो हक था तुम्हारे पे
की मेरा कुछ तो फर्क था तुम्हारे पे