यादें

as arijit singh once said,

“मैं तैनू समझावां की, ना तेरे बिना लगदा जी. तू की जाने प्यार मेरा, मैं करूं इंतजार तेरा”

यादें

उस एक इंसान की
उन साथ बिताए लम्हों की
ऐसा नहीं है
आप उन्हें याद करना चाहते हैं
ऐसा भी नहीं है
आपके नियंत्रण में होता ये
लेकिन उनका चेहरा
उनकी बातें
और
बीते वक्त की किताब के पन्ने
आपकी आंखों के सामने
जीवंत होकर एक तस्वीर से
असलियत में रुबरू हो जाते
बिना चाहे
वो आपको याद आ जाते
बिना बोले
वो आपको उदास से कर जाते
अगले ही पल मन होता
उनसे बात करने का
अगले ही पल मन होता
उनसे ये पूछने का
क्या उन्हें कोई खयाल नही आपका
क्या उन्हें कोई मतलब नहीं आपसे
क्या उन्हें याद नही आती
आपकी
आपके साथ बिताए उस वक्त की
खास या साधारण
ज्यादा या कम
अच्छा या बुरा
क्या उनके पूरे दिन की तस्वीर में
आपका कहीं जिक्र नहीं
जैसे आप उन्हें हर दूसरे लम्हे
अपने पास पाते
यादों के सहारे
खयालों में
क्या उनके लिए
आपका वजूद सिर्फ एक किस्सा था
ऐसा किस्सा जो वो दोहराना नही चाहते
खैर, इन सवालों से भी ज्यादा जरूरी
ये सवाल होता है
की क्या किया जाए
जब आपकी पसंद के उलट
उनकी याद आपको आती
जब आपकी चाहत के उलट
उनका चेहरा आपके सामने आता
वो उस वक्त में
आपसे कोसों दूर होते
लेकिन
आपके दिल में,
आपके दिमाग में,
आपके खयालों में,
आपके सवालों में,
बस एक वही होते.
और
विडंबना तो देखिए जनाब
आप अपनी तकलीफ भी
उनसे बयां नहीं कर सकते
क्योंकि
उनकी सुबह में
उनकी शामों में
आपका कहीं नाम नही
आपकी कोई पहचान नहीं
अजीब है ये
इंसान के दिल की गहराइयां
अजीब है ये
इंसान के दिल की परछाइयां

Published by Nidhi • निधि

🍀• शिव सदा सहायते • 🍀• A girl thinking about life at the same time living the life ✨

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