जिंदगी भी बचपन केउन इतवार के बाद आने वालेसोमवार जैसी हो गई हैजब स्कूल जाने कालाख ना मन होकरने को हजार बहाने होलेकिन स्कूल जाना ही पड़ता थाठीक वैसे हीजैसे इस जिंदगी को लाखना जीने का मन होकरने को हजार बहाने होंलेकिन इस जिंदगी कोजीना ही पड़ता हैहंसके, आंखे नम करकेबर्दाश्त करके या माफ करकेबसContinue reading “जिंदगी”