जिंदगी भी बचपन के उन इतवार के बाद आने वाले सोमवार जैसी हो गई है जब स्कूल जाने का लाख ना मन हो करने को हजार बहाने हो लेकिन स्कूल जाना ही पड़ता था ठीक वैसे ही जैसे इस जिंदगी को लाख ना जीने का मन हो करने को हजार बहाने हों लेकिन इस जिंदगी को जीना ही पड़ता है हंसके, आंखे नम करके बर्दाश्त करके या माफ करके बस जीना ही पड़ता है …!!
पहली बार ये खबर मिलना की इक नन्ही सी जान आने वाली है इस दुनिया में जिसमे मौजूद उसका अंश है उस वक्त से लेके इस नन्ही सी जान के इस दुनिया में आ जाने तक ये दुनिया नजरंदाज करती उसके हर एक भाव को हम उस मां की खुशियां तो जग में बांटते पर उस इंसान के भावों को शायद बयां करना भूल जाते जिसे हम “पिता” कहते वो क्या महसूस करते वो क्या सोचते उनकी क्या उम्मीदें हैं उनकी क्या ख्वाहिशें हैं उनकी खुशी और उनकी घबराहट उस नन्ही सी जान के लिए दिल के कोने में एक जगह बन जाना बिना उसके इस दुनिया में आए उसे अपनी दुनिया बना लेना वो बता नहीं पाते वो जता नही पाते मां तो सब जता लेती अपनी ममता में पर उस पिता की ममता कहीं ओझिल सी हो जाती जिसको वो शब्दो में कभी बयान नहीं कर पाता पर उसके हर एक वक्त में वो ममता छलकती उसके हर एक जिक्र में वो ममता महसूस होती उसका ह्रदय कठोर होता ऐसी अफवाहों से परे है उसकी ममता कभी समझ के तो देखो उसकी ममता कभी गौर करके तो देखो क्या है उसके दिल में पर हम अंदाजा तभी लगाते जब हम खुद उम्र के उस पड़ाव पर पहुंचते ना बोले भी सब कह जाना बिना जताए सब जता जाना बिना बताए हर बात की फिकर करना और बस निशब्द होकर अपने बच्चे को दुनिया की हर खुशी देना अपने बच्चे को दुनिया की हर बुराई से महफूज रखना कोई क्या अदा कर पाएगा उस पिता का कर्ज कभी इस जिंदगी में अपनी जेब खाली होते हुए भी पैसों के लिए अपने बच्चे को कभी मना करते नहीं है इंसान के रूप में मैने ऐसा देवता देखा है हां मैने एक पिता को देखा है अपने बच्चे पर उस कठिनाई की परछाई भी ना पड़ने देना जिसे उसने अपने जीवन में झेली अमीर ना होते हुए भी अपने बच्चे को वो अमीरी देना खुदा महफूज रखें इस अमानत को खुदा सलामत रखे इस दुवा को हर बच्चे को मिले उस पिता की अमीरी हर बच्चे को मिले उस पिता की छाया दुनिया बदल सी जाया करती है अगर उसका साथ नहीं इस सर पर उसका हाथ नही कोई नही पूछता आपकी सलामती कोई नही जताता अपना हक ये दुनिया अगर इक रणयुद्ध है तो वो पिता इक सारथी जो जीवन के हर मोड़ पर बिना बोले बस हमेशा अपनी मौजूदगी जता जाते
पसंद है मुझे मौसम ये बारिश का इक सुकून सी होती हैं बारिश की ये बूंदें जो दिल के किसी कोने में दबे जज़्बात को हवा दे जाती हैं पुराने बीते वो हर लम्हे गुजरे जिंदगी के कुछ हिस्से जिनमे सोंधी महक है खुशियों की उन उम्मीद्दों की अनकही मुलाकातों की एक तरफा बिना बताए बिना जताए किसी को दिल से चाहने की
और जिंदगी के सफर में धुंधले हो चुके कुछ अरमानों की ख्वाहिशों की बारिश की ये बूंदें हर जख्म को ताज़ा सी कर जाती हैं हर गम को कुरेद सी जाती हैं बिना आपके सोचे बिना आपके चाहे ये बूंदे अपनी मनमानी बस करती ही चली जाती हैं और फिर जाते जाते चेहरे पर इक हल्की सी मुस्कान व आने वाले कल की जद्दोजहद की कहानी लिख जाती हैं
इक वजह ये भी है इन बूंदों को पसंद करने की ये बूंदे मेरे आंखों से निकले उन आंसुओं को अपने में मिला जाती हैं मुझे उन बहानों से मुक्त कर जाती हैं जो इस दुनिया को देने होते अपने आंसू पोंछने के बाद वही दुनिया जो आपके दर्द की परवाह नहीं करती परवाह करती है तो सिर्फ उस दर्द को कब अपने मतलब में ला सके और हमें एक बार फिर से रोने को मजबूर कर दे
फिर बारिश की बूंदें ये कहकर की अगली बार जल्दी ही मिलूंगी इन सभी किस्सों को दोबारा याद दिलाने और मुझे अतीत से लेकर वर्तमान और भविष्य की सैर एक पल में एक साथ कराने मैं बारिश की इन बूंदों को ना चाहते हुए भी अलविदा कहती दोबारा फिर से मिलने और इन लम्हों को जीने की उम्मीद में।
the older i am getting, the more I am knowing value of being quite and just walk away when you have so much to say. i know my peace is much more important than proving my points. if you say I am wrong, I will simply accept that and move on.
the older I am getting, the more I am knowing the value of my parents little sacrifices which they have made in order to correct our lives. I am having feeling of sadness that they are growing older. no matter where I go what I do, I will never ever find selfless people like them in my whole life.
the older I am getting, I am disliking materialistic pleasures and I just want fewest people around me who know me best and have pure intentions for me. who are there for me when I need them. I am hating the crowd which just gest disappeared when I am in pain.
the older I am getting, I am learning to value money, small moments, loved ones and kindness. Because I know life has its own uncertainty and you just can’t be careless in these things.
the older I am getting, the more I crave for love which don’t need words to prove but which can be seen in actions. I just want a person besides me , with me and for me when I am at my lowest. the more I am learning the fact you can not be strong everytime. you need someone to be with you when you have lots of things to share.
the older I am getting, I am learning the value of being busy and being with ownself. the more I am not liking to be around fake people.
the older i am getting, the more I am learning to ignore toxicity and negativity going around. the more i am trying to love myself and the less I am trying to react what others think I am. I am accepting the fact that I am what I am. I am like that and I must need to accept this. the least I am trying to hurt anyone and if so I am learning the fact to say sorry to god for that mistake. All I want a good health, good people and good vibes around me. nothing more nothing less.
ना जाने कितने सपने पीछे छोड़ आयी तुम अपनो के लिए अपने ख्वाहिशो को दरकिनार करना इतना आसान भी तो नहीं जीवन भर सवालो का सामना उन सवालों के जवाब में खुद को खोने और पाने की जदोजहद रोज़ाना नई सी राहें हज़ारो अनचाही नज़रें सामना उन बातों से भी जिसे किसी से बांटने को भी मन सहर से उठता है खुद को समेटने का हुनर दर्द में भी मुस्कुराने की कला खुद पर गुरूर और उस गुरूर के पीछे टूट के बिखर जाने का खौफ खुद को साबित करने की धुन और कुछ कर गुजरने का जुनून ममता की परछाई प्रेम व स्नेह की हृदय में गहरी खाई परिवार पर सब कुछ न्योछावर कर देने वाली और जवाब में परायी होने का तंज पाने वाली औरों की खुशी के लिए खुद की आज़माइश में जीवन गुज़ारने वाली आसान तो नही है स्त्री होना शायद किसी ने कभी बयां न की हो तुम्हारी दिल की खूबसूरती चेहरे तो सब देखते किसी ने तुम्हे तुम्हारा होकर जाना हो तुम खुद को कभी टूटने ना देना इस भीड़ में खुद को खोने न देना उन सवालों को खुद पर हावी कभी होने न देना कोई यकीन करें न करे खुद पर तुम भरोसा हमेशा रखना साथ कोई हो या न हो तुम बस अपना रास्ता कभी ओझिल होने न देना खुद को सवारना खुद को निखारना खुद के लिए खुद को खुश रखने की कोशिश करना खुद के लिए वक़्त निकालके खुद से इश्क़ जरूर करना मोहताज नही तुम औरो के तारीफ़ों की तुम हो हर हाल में खूबसूरत बस ये याद रखना बस ये याद रखना
what you can not controle in life let it go what makes you sad let it go what bothers your peace let it go who can not love you back let them go who are not same behind your back let them go who makes your feel inferior let them go who was not with you in hardest let them go situations which are not in your hand let it go other’s behaviour and words you can’t change let it go what makes you stressed let it go
what life puts you in how to react Just learn that
you are not here to clean other’s mess you are not here to explain you are here to be you to feel good to be happy to get heal
the moment when you have a lot of emotions inside you somewhere in your heart you dont know its sadness or anxiety you dont know you want to share this or not you just want to be listened you just want to be hugged you just want to be feel loved you just want to be feel important the feeling that there is someone beside you when you dont need words to share you pain a glance of your face is enough to tell to someone that you are not really you at particular moment you dont want big words solutions or suggestions you just want that moment to feel better to recover to heal from what you are feeling from what you are enduring from what you fighting since long so long you just want shed those tears which you trapped behind your smile to someone, who knows you are smiling but not happy you just want that moment when nothing goes right in life when you are holding since long when you are tired of everything when you just dont want to express more fake smiles.
इक लडक़ी को सुरक्षा का एहसास होता जहाँ भी होती जिस भी जगह होती दिन के उजाले या रात के अंधेरों में डर से ज्यादा यकीन का नाम होता कभी भी उन गलत निगाहों का उसे सामना ना करना होता…।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
इक लड़की के जनम पर पिता को ज़िम्मेदारी, पैसे के खयाल से ज्यादा खुशियों का भाव होता उसके इस दुनिया में आने पर लोगों को उतनी ही खुशी होती जितने औरो के आने पर होती…।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
सब गुण ताक पर रखकर इक लड़की की खूबसूरती को ज्यादा महत्व ना दिया गया होता सब बातों से ज्यादा उसकी चेहरे की सुंदरता को पैमाना ना बनाया गया होता…।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
इक लड़की को पराया धन ना बोला गया होता उसे अपना घर छोड़ कहीं और ना जाना होता उसकी इच्छाओं को भी यहाँ सबसे ऊपर रखा गया होता इक लड़की को भी बोलने का उतना ही हक़ होता जितना सबका उसे अपने जीवनसाथी के साथ के लिए अपने परिवार से दूर ना जाना होता…।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
इक लड़की को वो सब आज़ादी होती जिनका खयाल उन्हें कभी न कभी तो आया होगा रात के पहर घर जल्दी आना अकेले बाहर न जाना किसी को साथ ले जाना इन सबसे परे होती उनकी दुनिया….।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
उन्हें अपनी ज़िंदगी अपने उसूलो पर जीने का अधिकार होता शादी के बाद किसी पर निर्भर ना रहना होता किसी और कि गलती का खामियाज़ा उन्हे ना भुगतना होता….।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
बलात्कार जैसे शब्द ना होते उस दर्द से किसी भी लड़की को कभी गुज़रना ना होता इक लड़की के पहनावे को उनकी इज़्ज़त का पैमाना ना माना गया होता…।।
कुछ यूं होता तो क्या होता
बाल विवाह, विधवा जीवन जैसी रूढ़ प्रथाएं इस दुनिया में ना बनी होतीं इक लड़की को सम्मान की नज़रों से देख़ा गया होता……।।