
वो नए किताब के पन्नो में
भीनी भीनी सी खुशबू की तलाश में
जाने कब हम बड़े से बड़े मुश्किलों से
अकेले लड़ने का हुनर रखने लगे
पता ही नहीं चला
एक टॉफी की मिठास से
दुनिया की सारी मीठी यादें
मुठ्ठी में करते करते
जाने कब हम जिंदगी की कड़वी से कड़वी
सच्चाई को आंख मूंद कर सहने लगे
पता ही नही चला
बड़े होके क्या बनना है
इस बात का सपना देखते देखते
उन सपनों को खेल में जीते जीते
जाने कब हमारे सारे सपने
बस दरकिनार से हो गए
पता ही नहीं चला
एक कट्टी से बाते बंद होने पर
एक बट्टी से फिर से
पुरानी सी दोस्ती हो जाने वाली
जाने कब सालों साल
अपने से लगने वाले दोस्तों से
रिश्ते टूट गए
पता ही नही चला
दुनिया समेटते समेटते
कब खुद को खोने लगे हम
पता ही नही चला
बंद मुठ्ठी से ख्वाहिशें
कब रेत सी फिसलने लगीं
पता ही नही चला
नई कक्षा में जाने की खुशी
नए कवर से किताबों को
सजाने की खुशी
वो पहले पन्ने पर
लेख लिखने की खुशी
जैसे हमने सबकुछ हासिल सा कर लिया हो
ये खुशी कब
धूमिल सी होने लगी
पता ही नही चला
किसी के लिए गिले शिकवे
ना रखते रखते
कब दिल में शिकायतों का
गट्ठर सा रखने लगे
पता ही नही चला
वो गुड्डे गुड़ियों के खेल में
सच्चा प्यार खोजते खोजते
कब हम टूटे दिल को लेकर
असलियत में सिसकने लगे
पता ही नही चला
पापा सब संभाल लेंगे
मां हैं ना
ये भरोसा रखते रखते
उन्ही से कब अपनी तकलीफें
और अपने आंसू छिपाने लगे
पता ही नही चला
आसमान में उड़ते जहाज को देखकर
एक दिन
उस आसमान को छूने की चाह रखते रखते
कब अपनी जन्मभूमि से ही अलग हो गए
पता ही नही चला
सबको अपना समझने वाले
यारी निभाते निभाते
कब नए शहर में
बस एक अजनबी से बनके रह गए
पता ही नही चला
बारिश होने पर उस कागज की नाव से
दुनिया घूम लेने वाले
जाने कब उन्ही कागजों से
नफरत करने लगे
पता ही नही चला
काश को वो बचपन कोई वापस दे जाता
उसके बदले सारे ऐशो आराम ले जाता
बस वो बेफिक्री वापस कर जाता
वो सुकून वापस कर जाता
और वो हंसते चेहरे वापस कर जाता
जब हम दिल से खुश होते थे
दुनिया को दिखाने के लिए
झूठा दिखावा नहीं करते थे
जब हम माफ किया करते थे
बिना दिल में शिकवे रखे
बस भूल जाया करते थे
और फिर पहले से
पुराने से हो जाया करते थे
काश कोई वो समय वापस दे जाता
उसके बदले आज के
सभी समान वापस ले जाता सारे धोखे वापस ले जाता
और टूटे दिल को फिर से जोड़ने की
आस वापस ले जाता ……!!!








