and then………..you are FOUND by the ONEthe RIGHT one,who made sure that your smile never fadesin all choas of life dilemmaswho made sure that your soul never takesany grief you never deserved and then……you are LOVED by the ONEthe right oneto make you believethat all the love you gave to wrong oneswas never a wasteaitContinue reading “and then….”
Category Archives: Uncategorized
रफ्ता रफ्ता….
“आप से…तुम हुएफिरतू का उन्वाँ हो गएरफ्ता रफ्ता……वो मेरे, हस्ती का सामां हो गए”
सफर…..
सफर….. लम्बा होगातुमसुंदर की जगह एक समझदार को चुनना
मुक्त कर दो……
हृदय जब तक मुक्त ना करेकोई जाता नहीं है प्रिये बस इसीलिएमुक्त कर दोहर उस व्यक्ति कोजिसके तुम हमेशा से थेपर वो कभी तुम्हारा नहींहर उस राह कोजिसकी कभी कोईमंजिल ना थीहर उस ख्वाब कोजो आंखों में थेपर पूर्ण ना हुएहृदय की हर उस पीड़ा कोजिसने सुख से ज्यादादिल को जख्म दिए होंहर उस अनकहीContinue reading “मुक्त कर दो……”
तेरे कंधे पर अपना सिर रखकर……
तेरे कंधे पर अपना सिर रखकर,रास्ता तय करना हैसफर……..एक ऐसे सफर का रास्ताजिसकी शुरुआत भी तूऔरजिसकी मंजिल भी तूउस एक सुकून के साथउस एक खयाल के साथकी चाहे कुछ भी हो जाएकी चाहे कोई साथ हो या ना होतू हमेशा रहेगामेरे साथमेरे आसपासये दुनिया होगी बुरीइस दुनिया के लोग होंगे बुरेजिन्हें कुछ फर्क नहीं पड़तामेरेContinue reading “तेरे कंधे पर अपना सिर रखकर……”
चाय कहूं या इश्क ?
चाय कहूं या इश्क ? जब भी मिलती हैथोड़ी थोड़ी कम सी लगती हैजैसे तेरा आस पास होनाजब भी होता हैतेरा साथ होना ….कम सा लगता हैजैसे चाय जरूरी सी हैइस जिंदगी के लिएऔरइस जिंदगी केहर एक भावनाओं के लिएरोजमर्रा की हर जरूरत के लिएवैसे हीतेरा होना…..जरूरी सा हैइस जिंदगी में रौनक लाने के लिएऔरहरContinue reading “चाय कहूं या इश्क ?”
बस तू चाहिए ….
आंखों को आरामऔरदिल को सुकून चाहिएहाथों में तेरा हाथऔरसामने……..बस तू चाहिए !!
मेरा है तू……. सिर्फ मेरा है तू
बेखुदी को खुद में समा करखुद को मुझमें शामिल करने वाला है तूक्योंकि वो बेखुदीमुझे परेशान सा कर जाती हैबेचैनी में चैन सा महसूस होकेमुझसे मिलने वाला है तूक्योंकि वो बेचैनीमुझे बेचैन सा कर जाती हैअपने चेहरे की उदासी को छिपाकरमुस्कुराहट को जाहिर करने वाला है तूक्योंकि वो उदासीमुझे उदास सा कर जाती हैखुद केContinue reading “मेरा है तू……. सिर्फ मेरा है तू”
इश्क तो लाज़मी सा है…..जिंदगी के लिए
खुद से ही करके गुफ्तगूकोई कैसे जीयेइश्क़ तो लाज़मी सा हैज़िन्दगी के लिएदिल क्या करेदिल को अगर अच्छा लगे कोईझूठा सहीदिल को मगर सच्चा लगे कोईदरवाज़े से निकले ज़राबाहर को रहगुज़रहर मोड़ पे जो साथ होऐसा हो हमसफ़र जीने भी दे दुनिया हमेंइल्ज़ाम ना लगाइक बार तो करते हैं सबकोई हसीं खतावरना कोई कैसे भलाचाहेContinue reading “इश्क तो लाज़मी सा है…..जिंदगी के लिए”
ऐ हमनवां ….
वैसे तो मौसम गुजरे हैंजिंदगी में कईपर अब ना जाने क्यों वो मुझेलग रहे हैं हसींतेरे आने पे जाना मैंनेकहीं न कहीं ……जिंदा हूं मैंजीने लगी हूं मैंअब ये फिजाएंचेहरे को छूती हवाएंइनकी तरह……..दो कदम तो बढ़ादेऐ हमनवा …….ज़रा अपना बना ले