आखिरी वक्त

इक सांस थमने की देरी हैबस इक सांस छूटने की देरी हैशिकायतें,किस्से,जिंदगी,परिवार,लोग,यारी, दोस्ती सबअधूरे रह जाने हैंकुछ पाकर भी ना मिलना हैकुछ मिलकर भी खो सा जाना हैआज, कल याशायद हमेशा के लिएयादों के गट्ठर मेंआपको बस दफन सा हो जाना हैइक याद si बनकर रह जानी हैआपकी पूरी दुनियाआपका अस्तित्वआपका व्यक्तित्वसबकुछ बस धुंधला साContinue reading “आखिरी वक्त”

SHE

she always wanted a comfortin someonein somethingthat was only hersto be claimedto be toldto be belongedto be togetherthen, now and forevershe did not needroads full of new facesroads full of strangersroads full of peopleroads full of crowdshe did not wishfor materialistic pleasuresfor money treasuresfor ambitious creaturesshe always seekeda person full of calma situation full ofContinue reading “SHE”

the longer days are passing

as longer the days are passingwhen you see others painwhen you know about others problemsno matter how much you are complainingabout your lifeabout your painyour pain start seem a little lesswhen you see helplessness of a parentswho can’t save their kid liveswhen you see grief of a kidwhose both parents are no morewhen you seeContinue reading “the longer days are passing”

किसी को उम्मीद देकर

कितना अजीब सा होता है नाकिसी को उम्मीदें देकरएक पल मेंदरकिनार करनाकिसी के दिल में जगह बनाकेएक पल मेंअजनबी सा बन जानाकिसी को ना जाननाफिर भी सुकून भरा होताकिसी को ना चाहनाफिर भी सुकून भरा होताकिसी को जानकरना जाननाबहुत तकलीफ देताकिसी को चाहकरना चाहनाबहुत तकलीफ देताऔर बात तो ये हैआप बेहद बेबस होतेउस लम्हे मेंजबContinue reading “किसी को उम्मीद देकर”

ख्वाहिशों को दिल में

ख्वाहिशों को दिल में दबाए रखा हैबातों को अनकही बनाए रखा हैकिसी रोज जब होगी मुलाकात तुमसेउस वक्त के लिए इनको सजाए रखा हैइंतजार है उस लम्हे का बड़ी बेखुदी सेजिस लम्हे में तुझे सहेजे रखा हैकहीं किसी मोड़ पर जिंदगी केजब तू मिलेगा, करने को तुझसे फिक्र औरशिकायतें रखा है.

कुछ वक्त सा लेकर

किसी शाम आना तूकुछ वक्त सा लेकरकरनी है तुमसे कुछ बातेंजो कहने को हैं शिकायतेंकुछ तुम्हे है समझानाऔर पूरा है तुम्हे समझनाकैसे गुजरते हैं दिन तेरेकैसे कटती हैं तेरी शाम ए महफिलतू होता है अकेला उस भीड़ मेंया मैं हूं मौजूद तेरे उस वक्त मेंसाथ ना होके भीपास ना होके भीक्या रखता है तू मेरीContinue reading “कुछ वक्त सा लेकर”

उम्र के पड़ाव 🤍✍️

कितनी बार ऐसे पड़ाव परये जिंदगी फिर रुक सी जाती हैजहां आपको ये महसूस होने लगता है “बस मुझसे नहीं होगा अब”“मैं नहीं कर सकती”“मैने सब खराब कर दिया”“मैने सब बर्बाद कर दिया”“मैं अपने मां पिता को वो नही दे पाई,जिसके वो हकदार थे”“उनके कष्ट, उनके बलिदान, उनकी ख्वाहिशें”“सब हमसे जुड़ी थी”या यूं कहिए“उस इंसानContinue reading “उम्र के पड़ाव 🤍✍️”

क्या कीमत है

क्या कीमत हैउस भीड़ कीभीड़ में मौजूद हर उस शक्श कीजिनके सामने आपखुल्के हंस तो सकते हैंलेकिन रो नहीं सकतेअपना दर्द बांट नही सकतेभीड़ में अपनेउन आंसुओं कोआंखो में कैद रखने कीक्या कीमत हैऐसे साथ कीलोगों के हाथ कीउनकी कही हर एक बात कीजब आप अपने जज्बात कोअंदर समेटेबस घुटते रहते हैंसहमे रहते हैंसब कुछबसContinue reading “क्या कीमत है”

रफ्तार

रफ्तार भरी इस जिंदगी मेंइस भीड़ कोजाना है कहांहै किसे पतारुकना गवारा नहीं यहांकिसी शख्स कोकभी दौड़ मेंजीतने का जुनूनकभी दूसरों सेआगे निकलने की होड़बिना मंजिल का पता हुएकभी बस यूंहीचलते चले जानाना है शौक ए मंजरइस रफ्तार काकिसी को यहांपर पीछे छूट जाने का खौफहै हर किसी को यहांचारों तरफभीड़ और सिर्फ भीड़सुकून हैContinue reading “रफ्तार”

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