तू सर्दी की धूप सा है।

तू सर्दी के दिनों कीगुनगुनी धूप सा हैजिसकी गर्माहट जरूरी सी हैउन दिनों के लिए.जिसका वजूद होता तो हमेशा हैलेकिन उन दिनो मेंतू बस जरूरी सा हैजीने के लिए, जिंदगी के लिए….!!

इस भीड़ से परे

इस भीड़ से परेइक दुनिया है कहींजहां सुकून हैसुकून इस बात का की तू साथ हैसुकून इस बात का की कोई हैजिसके बस होने भर से तकलीफें कम सी हैंजिसके बस वजूद से इक हिम्मत सी हैकि कोई तो है जिसके लिए आप जरूरी होआपका होना मायने रखता हैआपकी खुशियांऔर आपके दुख मायने रखते हैं

मेला

बचपन और मेलेहमेशा से एक दूसरे केसमप्रत्यय प्रतीत होते हैंवो चेहरे की चमकजगमग रोशनी को भीफीकी सी कर देती हैवो पसंद के गुब्बारे मिलने परखुलके चहचहा उठनातरह तरह की मिठाइयां देखकरउन्हें अपनी दुनिया की मिठास समझ लेनाजैसे जन्नत उन्ही में बसती होये मिठास बाद में बहुत याद आती हैजब जीवन प्रतिदिन एक नईकड़वी सच्चाई सेContinue reading “मेला”

खोई हुई चीजें

अक्सर खोई हुई चीजेंमिल जाती हैंकहीं ना कहींघर के किसी कोने मेंखोए हुए पसंदीदा कलम,वो किसी खास के दिए हुए खत,आंखों को चमकाने वालीवो खूबसूरत सी तस्वीरेबाज दफा इस बारखुद को जो खोया हैउस खुद से मिलेजमाने हो गएइस मुलाकात कोखुद को पाने कीखुद को पहले सा, पुराना सापाने की हर वो मुमकिन सी मशक्कतनाकाबिलContinue reading “खोई हुई चीजें”

ये खुला आसमान

ये खुला आसमानमंद मंद सी चलती ये हवाएंभीनी भीनी सी पौधो की खुशबूशाम होती कुछ हसीन सी हैये शाम होती कुछ सुकून सी हैदिन भर की थकानलू के थपेड़ेलोगों की अनचाही भीड़और जिंदगी कोसही से चलाने की जद्दोजहदइक शाम चाहिए होती हैखुलके सांस लेने कोइक खुला आकाश चाहिए होता हैखुद को समझने के लिएवजूद कोContinue reading “ये खुला आसमान”

कोई अनकहा सा

अगर तुम्हारे उदासी भरे आंखोंऔर हंसते हुए चेहरे के पीछे कीकहानी समझ लेता है कोईतो उसे संभाल कर रख लेनासंजो कर किसी कीमती बक्से मेंबस अपने तक रख लेनादुनिया की नजरों से बचा केखुद को खुशनसीब सा समझ लेनाजो तुम्हारे दर्द की दवा बनेजो तुम्हारे जख्मों के मरहम बनेजिसके बस पास होने से तुम्हे हिम्मतContinue reading “कोई अनकहा सा”

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