
पहली बार ये खबर मिलना
की इक नन्ही सी जान
आने वाली है इस दुनिया में
जिसमे मौजूद उसका अंश है
उस वक्त से लेके
इस नन्ही सी जान के
इस दुनिया में आ जाने तक
ये दुनिया नजरंदाज करती
उसके हर एक भाव को
हम उस मां की खुशियां तो
जग में बांटते
पर उस इंसान के भावों को
शायद बयां करना भूल जाते
जिसे हम “पिता” कहते
वो क्या महसूस करते
वो क्या सोचते
उनकी क्या उम्मीदें हैं
उनकी क्या ख्वाहिशें हैं
उनकी खुशी
और उनकी घबराहट
उस नन्ही सी जान के लिए
दिल के कोने में एक जगह बन जाना
बिना उसके इस दुनिया में आए
उसे अपनी दुनिया बना लेना
वो बता नहीं पाते
वो जता नही पाते
मां तो सब जता लेती
अपनी ममता में
पर उस पिता की ममता
कहीं ओझिल सी हो जाती
जिसको वो शब्दो में कभी
बयान नहीं कर पाता
पर उसके हर एक वक्त में
वो ममता छलकती
उसके हर एक जिक्र में
वो ममता महसूस होती
उसका ह्रदय कठोर होता
ऐसी अफवाहों से परे है
उसकी ममता
कभी समझ के तो देखो
उसकी ममता
कभी गौर करके तो देखो
क्या है उसके दिल में
पर हम अंदाजा तभी लगाते
जब हम खुद
उम्र के उस पड़ाव पर पहुंचते
ना बोले भी सब कह जाना
बिना जताए सब जता जाना
बिना बताए हर बात की फिकर करना
और
बस निशब्द होकर
अपने बच्चे को दुनिया की हर खुशी देना
अपने बच्चे को दुनिया की हर बुराई से
महफूज रखना
कोई क्या अदा कर पाएगा
उस पिता का कर्ज कभी इस जिंदगी में
अपनी जेब खाली होते हुए भी
पैसों के लिए
अपने बच्चे को कभी
मना करते नहीं है
इंसान के रूप में
मैने ऐसा देवता देखा है
हां मैने एक पिता को देखा है
अपने बच्चे पर उस कठिनाई की
परछाई भी ना पड़ने देना
जिसे उसने अपने जीवन में झेली
अमीर ना होते हुए भी
अपने बच्चे को वो अमीरी देना
खुदा महफूज रखें
इस अमानत को
खुदा सलामत रखे
इस दुवा को
हर बच्चे को मिले
उस पिता की अमीरी
हर बच्चे को मिले
उस पिता की छाया
दुनिया बदल सी जाया करती है
अगर उसका साथ नहीं
इस सर पर उसका हाथ नही
कोई नही पूछता
आपकी सलामती
कोई नही जताता
अपना हक
ये दुनिया अगर इक रणयुद्ध है
तो वो पिता इक सारथी
जो जीवन के हर मोड़ पर
बिना बोले बस हमेशा
अपनी मौजूदगी जता जाते