
“आदत”
अगर किसी अच्छे काम की लगे
तो मजबूती बन जाती है आपकी
किसी बुरे काम की लगे
तो मजबूरी बन जाती है आपकी
और
अगर किसी इंसान की लगे
तो कमजोरी बन जाती है आपकी
एक लम्हे से कुछ वक्त
कुछ वक्त से घंटों
और
घंटे से पूरा दिन
बातें,
मुलाकातें,
खयालात,
कभी कभी किसी खास वजह से
और
ज्यादातर बिना किसी वजहात के
विडंबना देखिए कि जब तक आपको ये समझ मे आता है
की आपको बाज़ दफा किसी की आदत सी लग रही
तब तक आप उस इंसान के आदती बन चुके होते हो
तक तक आप उस काम के आदती बन चुके होते हो
अब ये आदत अच्छी हो या बुरी
झेलना आपको ही है
अगर इसे खतम किया जाए
तो तकलीफ आपको होनी है
अगर इसे जारी रखा जाए
तो दिल आपका टूटना है
क्योंकि समय और इंसान
एक जैसे कभी नहीं रहने वाले
दोनो तरफ से
नुकसान आपका है
दोनो तरफ से घाटे का सौदा
आपका है