
नारी
अस्मिता की मूरत
अस्तित्व की सूरत
ना जाने कितने सपने पीछे छोड़ आयी तुम
अपनो के लिए
अपने ख्वाहिशो को दरकिनार करना
इतना आसान भी तो नहीं
जीवन भर सवालो का सामना
उन सवालों के जवाब में
खुद को खोने और पाने की जदोजहद
रोज़ाना नई सी राहें
हज़ारो अनचाही नज़रें
सामना उन बातों से भी
जिसे किसी से बांटने को भी
मन सहर से उठता है
खुद को समेटने का हुनर
दर्द में भी मुस्कुराने की कला
खुद पर गुरूर
और उस गुरूर के पीछे
टूट के बिखर जाने का खौफ
खुद को साबित करने की धुन
और
कुछ कर गुजरने का जुनून
ममता की परछाई
प्रेम व स्नेह की हृदय में गहरी खाई
परिवार पर सब कुछ न्योछावर कर देने वाली
और जवाब में परायी होने का तंज पाने वाली
औरों की खुशी के लिए
खुद की आज़माइश में
जीवन गुज़ारने वाली
आसान तो नही है
स्त्री होना
शायद किसी ने कभी बयां न की हो
तुम्हारी दिल की खूबसूरती
चेहरे तो सब देखते
किसी ने तुम्हे
तुम्हारा होकर जाना हो
तुम खुद को कभी टूटने ना देना
इस भीड़ में खुद को खोने न देना
उन सवालों को खुद पर
हावी कभी होने न देना
कोई यकीन करें न करे
खुद पर तुम भरोसा हमेशा रखना
साथ कोई हो या न हो
तुम बस अपना रास्ता
कभी ओझिल होने न देना
खुद को सवारना
खुद को निखारना
खुद के लिए
खुद को खुश रखने की
कोशिश करना
खुद के लिए वक़्त निकालके
खुद से इश्क़ जरूर करना
मोहताज नही तुम औरो के तारीफ़ों की
तुम हो हर हाल में खूबसूरत
बस ये याद रखना
बस ये याद रखना